आईएलएफएस जांच:अच्छी रेटिंग पाने के लिए साम-दाम समेत उपहार देने के तरीके भी अपनाए गए

By PTI | New Delhi | Updated: Jul 20 2019 6:55PM

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) संकटग्रस्त आईएलएफएस की फॉरेंसिक ऑडिट रपट में समूह के पूर्व प्रबंधन की तमाम अनियमिताओं को उजागर किया गया जिनमें यह बात भी है कि कंपनियों की वित्तीय हालत खराब होने के बावजूद उनकी वित्तीय रेटिंग का अच्छा प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए रेटिंग एजेंसियों के बड़े अधिकारियों को प्रलोभन दिए गए ।

आईएलएफएस समूह 90,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के बोझ तले दबा है।

समूह के ख्रोखलेपन की बात सामने आने के बाद सरकार ने इसके नए निदेशक मंडल का गठन किया था। नए निदेशक मंडल ने समूह का फॉरेंसिक ऑडिट करने की जिम्मेदारी ग्रांट थॉर्टन को सौंपी थी जिसकी अंतरिम रपट में यह जानकारी सामने आयी है।

सूत्रों ने बताया कि जांच में उच्च रेटिंग पाने के लिए आईएलएफएस के पूर्व प्रबंधन अधिकारियों द्वारा रेटिंग एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों और उनके परिवार वालों को महंगे उपहार दिए गए और रेटिंग की रपट बदलने के भी सुझाव दिए गए।

अभी यह जांच चल ही रही है। जांच के दौरान ही दो रेटिंग एजेंसियों के निदेशक मंडलों ने उनके मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को लंबी छुट्टी पर भेज दिया है। आईएलएफएस के तत्कालीन प्रबंधकों की ओर से रेटिंग कार्य को प्रभावित करने के बारे में नए सबूत सामने आए हैं।

ग्रांट थॉर्टन ने विभिन्न क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा समूह की आईएलएफएस ट्रांसपोर्टटेशन नेटवर्क (आईटीएनएल), आईएलएफएस फाइनेंशियल सर्विसेस (आईएफआईएन) और आईएलएफएस लिमिटेड कंपनियों को दी गयी रेटिंग की भी समीक्षा की। फोरेंसिक आडिट का मकसद कोष के दुरुपयोग, फर्जी लेनदेन, उनके तौर-तरीके और वित्तीय नुकसान के दायरे का पता लगाना एवं इन सभी की जिम्मेदारी तय करना है।

अंतिम रपट में ग्रांट थॉर्टन ने पाया कि रेटिंग एजेंसियों ने जुलाई/अगस्त 2018 में तब तक कंपनी की अच्छी रेटिंग को बनाए रखा जब तक आईटीएनएल के पुनर्भुगतान की किस्त की चूक सामने नहीं आयी। जांच अवधि की समीक्षा में पाया गया कि इस दौरान कंपनी ने क्रिसिल लिमिटेड, केयर रेटिग्स, इक्रा, इंडिया रेटिंग और ब्रिकवर्क की सेवाएं ली।

फोरेंसिक आडिट में अप्रैल-सितंबर 2013-18 के दौरान समूह की कंपनियों के बड़े मूल्य के सौदों की भी जांच की जा रही है।

वैसे रेटिंग एजेंसियों के अधिकारियों ने अपने काम में खामी या गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए इसका दोष आईएलएफएस समूह के तत्कालीन प्रबंधकों पर मढ़ा है।

कुछ रेटिंग एजेंसियों ने कहा है कि अंतरिम फारेंसिक आडिट रपट ऐसे लगती है जैसे यह एकतरफा जानकारी पर तैयार की गयी है और इसे तैयार करने वालों को वित्तीय रेटिंग (साख) निर्धारण प्रक्रिया की जानकारी कम है।

इंडिया रेटिंग्स ने शनिवार को कहा कि उसकी मातृ कंपनी फिच के सिंगापुर कार्यालय ने इस मामले में वरिष्ठ निदेशक की भूमिका की जांच की है। जांच में पाया गया कि अधिकारी ने कंपनी की आचार संहिता का उल्लंघन किया और अब वह कंपनी का कर्मचारी नहीं है।

कंपनी की रेटिंग में अपनायी गयी प्रक्रिया को सही बताया और कहा कि उसने इस काम में कंपनी से प्राप्त सूचनाओं का कड़ाई और पारदर्शिता के साथ विश्लेषण किया था। इसमें कंपनी के ऑडिट किए गए वित्तीय दस्तावेजों का विश्लेषण भी शामिल है। रेटिंग एजेंसी ने फोरेंसिक जांच में आयी खामियों का ठीकरा आईएलएफएस समूह के पूर्व शीर्ष प्रबंधकों पर फोड़ने का प्रयास किया है। उसका कहना है कि पूर्व प्रबंधकों ने कारोबार के बारे में गलत सूचनाएं दी और वित्तीय स्थिति पर लीपापोती की थी।

रपट के अनुसार आईएलएफएस फाइनेंशियल सर्विसेस (आईएफआईएन) के पूर्व मुख्य कार्यकारी रमेश बावा ने फिच रेटिंग्स के दक्षिण एवं दक्षिण एशिया के संस्थान प्रमुख अंबरीश श्रीवास्तव की पत्नी को एक विला खरीदने में मदद की, साथ ही उन्हें भारी छूट दी।

बावा ने यूनिटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अजय चंद्रा से निजी तौर पर इसमें संलग्न होकर श्रीवास्तव की पत्नी के मामले को सुलझाने के लिए कहा। श्रीवास्तव की पत्नी को इस विला की खरीद पर देरी से भुगतान को लेकर ब्याज के मामले का सामना करना पड़ा था।

कंपनी के एक और मेल में पाया गया कि ब्रिकवर्क रेटिंग्स के संस्थापक और निदेशक डी. रविशंकर ने अरुणा साहा को धन्यवाद भेजा है। साहा उस समय आईएफआईएन के संयुक्त निदेशक थे। साहा ने रविशंकर को उनके बेटे साथ स्पेन के मैड्रिड में रीयल मैड्रिड का फुटबाल मैच देखने के लिए टिकट उपलब्ध कराए थे।

एक और ई मेल में साहा आईएलएफएस के मुख्य जोखिम अधिकारी सुजॉय दास से केयर के प्रबंध निदेशक राजेश मोकाशी के लिए उनकी पसंद का फिटबिट बैंड खरीदने के लिए कह रहे हैं।

भाषा

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